MAITHILI THAKUR [DAUGHTER OF BIHAR]

 

मैथिली ठाकुर 

परिचय:
मैथिली ठाकुर भारत की एक प्रसिद्ध युवा लोकगायिका हैं, जिन्होंने पारंपरिक भारतीय संगीत, विशेषकर भोजपुरी, मैथिली, हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लोकगीतों को नई पहचान दी है। वह अपनी सुरीली आवाज, शास्त्रीय प्रशिक्षण और लोकसंस्कृति से जुड़ी प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उनके लाखों चाहने वाले हैं।


प्रारंभिक जीवन:
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बेगूसराय, बिहार में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर एक संगीत शिक्षक हैं और माता का नाम भावना ठाकुर है। उनका नाम "मैथिली" उनकी मातृभाषा मैथिली भाषा के सम्मान में रखा गया।
बचपन से ही संगीत का माहौल घर में था। उनके पिता ने उन्हें और उनके भाइयों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। उन्होंने बहुत कम उम्र में मंच पर गायन शुरू कर दिया था।


शिक्षा और संगीत प्रशिक्षण:
मैथिली की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में हुई, जहाँ उनका परिवार शिफ्ट हो गया था। उन्होंने गांधर्व महाविद्यालय, नई दिल्ली से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली।
वे ख्याल, ठुमरी, दादरा, भजन, लोकगीत और सूफी संगीत में निपुण हैं।


करियर की शुरुआत:
मैथिली ने अपने करियर की शुरुआत विभिन्न टीवी रियलिटी शोज़ से की।

  • वे "संगीत का महा मुकाबला", "इंडियन आइडल जूनियर", और "राइजिंग स्टार" जैसे शोज़ में भाग ले चुकी हैं।
  • विशेष रूप से 2017 के राइजिंग स्टार में वे फाइनल तक पहुंचीं और उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया।

इसके बाद उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर अपने भाइयों रिषभ और अयाची के साथ पारंपरिक लोकगीत, भजन और शास्त्रीय गायन प्रस्तुत करना शुरू किया, जिसे करोड़ों लोगों ने सराहा।


लोकप्रियता और योगदान:
मैथिली ठाकुर ने भोजपुरी, मैथिली, हिंदी, बंगाली, ओड़िया, संस्कृत, तमिल जैसी भाषाओं में गीत गाकर यह दिखा दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती।
उनके गाए विद्यापति के गीत, कबीर के दोहे, मीरा भजन, छठ गीत, और शादी-ब्याह के पारंपरिक लोकगीत लोगों में खासे लोकप्रिय हैं।

उनका यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर करोड़ों फॉलोअर्स हैं, जो उनके संगीत के प्रति प्रेम को दर्शाता है।


पुरस्कार और सम्मान:

  • भारत सरकार ने उन्हें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया है।
  • उन्हें कई राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
  • कई संस्कृति मंत्रालय के प्रोग्रामों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

निष्कर्ष:
मैथिली ठाकुर आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं, जिन्होंने अपनी संस्कृति, परंपरा और संगीत को समर्पित जीवन जीते हुए विश्वभर में भारतीय लोकसंगीत को पहचान दिलाई है। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर जड़ से जुड़े रहो तो शिखर तक पहुँचना आसान हो जाता है।


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