BHOJPURI
भोजपुरी भाषा
परिचय:
भोजपुरी भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय भाषा है, जो न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। यह भाषा पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और उत्तर-पश्चिम झारखंड में मुख्य रूप से बोली जाती है। भोजपुरी की मिठास, सजीवता और सांस्कृतिक विविधता इसे एक विशेष पहचान देती है।
भौगोलिक विस्तार:
भोजपुरी भाषा मुख्यतः उत्तर प्रदेश के बनारस, गाज़ीपुर, बलिया, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, और बिहार के बक्सर, भोजपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज जिलों में बोली जाती है। इसके अलावा झारखंड के कुछ हिस्सों में भी इसका चलन है।
दुनिया के कई देशों जैसे मॉरीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो में भी प्रवासी भारतीयों द्वारा भोजपुरी बोली जाती है।
भाषिक परिवार और विशेषताएँ:
भोजपुरी हिंदी-आर्य भाषा परिवार की एक महत्वपूर्ण भाषा है। यह अपने आप में एक पूर्ण भाषा है, जिसमें स्वयं का व्याकरण, शब्दकोश और साहित्य है।
भोजपुरी में लोक शैली की स्पष्ट छाप देखने को मिलती है। इसमें "हम" का प्रयोग 'मैं' के लिए, और "बानी", "बाड़ा", "हउआ" जैसे क्रियापदों का प्रयोग होता है।
उदाहरण:
- हम जा तानी। (मैं जा रहा हूँ।)
- तोहार नांव का हउआ? (तुम्हारा नाम क्या है?)
साहित्य और सांस्कृतिक योगदान:
भोजपुरी भाषा में लोकगीत, लोककथाएँ, नाटक, भजन, कविताएँ आदि का अपार भंडार है। विवाह गीत, कजरी, बिरहा, आल्हा, सोहर, फगुआ आदि भोजपुरी संस्कृति की जान हैं।
भिखारी ठाकुर, जिन्हें "भोजपुरी के शेक्सपियर" कहा जाता है, ने इस भाषा को मंचीय पहचान दिलाई। उनकी नाटक शैली आज भी लोकप्रिय है।
आज भोजपुरी में फिल्में, संगीत और साहित्य का एक बड़ा बाजार है, जो इसे जीवंत बनाए हुए है।
वर्तमान स्थिति और मान्यता:
भोजपुरी को अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिला है, जबकि इसे बोलने वालों की संख्या 20 करोड़ से अधिक मानी जाती है।
हालांकि भोजपुरी फिल्मों, टीवी चैनलों, और डिजिटल माध्यमों से इसका प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से हो रहा है।
निष्कर्ष:
भोजपुरी भाषा न सिर्फ एक संवाद का साधन है, बल्कि यह पूर्वांचल की सांस्कृतिक आत्मा है। इसके संरक्षण, मान्यता और शिक्षा में समावेश के लिए ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
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